
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती की सड़कों पर ‘रसूख’ का शोर: कब जागेगा प्रशासन?
- कानून को ठेंगे पर रख दौड़ रही गाड़ियाँ, शहरवासियों की सुरक्षा पर भारी ‘अवैध’ शोर
- प्रशासन की नींद और रसूखदारों की दादागिरी: बस्ती में खुलेआम उड़ रही ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ
बस्ती: क्या बस्ती की सड़कों पर अब कानून का राज नहीं, बल्कि रसूख का शोर चलता है? शहर की सड़कों पर निजी वाहनों में धड़ल्ले से बजते अनधिकृत हूटर और सायरन इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि यहाँ नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।हमारे शहर की सड़कों पर इन दिनों एक अजीब और डरावना चलन तेजी से बढ़ रहा है। क्षेत्रीय नेताओं और रईसजादों द्वारा अपने निजी वाहनों पर अवैध रूप से हूटर और सायरन लगाकर चलना अब एक ‘स्टेटस सिंबल’ बन गया है। नियम-कानून को ताक पर रखकर किए जा रहे इस प्रदर्शन से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।
नियमों की सरेआम धज्जियाँ
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 119 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत निजी वाहनों पर हूटर या सायरन लगाना पूरी तरह गैरकानूनी है। यह सुविधा केवल पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए आरक्षित है। लेकिन बस्ती में क्षेत्रीय नेताओं और रईसजादों ने इन नियमों को मानो अपनी जेब में रख लिया है।
क्यों है यह समस्या?
- नियमों का उल्लंघन: केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 119 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत निजी वाहनों पर हूटर या सायरन लगाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
- आपातकालीन सेवाओं का दुरुपयोग: सायरन की सुविधा केवल पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी अति-आवश्यक सेवाओं के लिए है, न कि निजी रसूख दिखाने के लिए।
- जन सुरक्षा को खतरा: मुख्य मार्गों और बाजारों में बिना किसी आपात स्थिति के, तेज रफ्तार में बजते ये हूटर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए खौफ का कारण बन गए हैं, जिससे वे अचानक सहम जाते हैं।
आम जनता खौफ में, प्रशासन नींद में
मुख्य मार्गों, व्यस्त बाजारों और बस स्टैंड के आसपास बिना किसी आपात स्थिति के भी, ये वाहन अपनी धौंस जमाते हुए तेज रफ्तार से गुजरते हैं। इनका कर्कश शोर सुनकर सड़कों पर चलने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सहम जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि पुलिस समय-समय पर चेकिंग का दावा तो करती है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। रसूख के बल पर कानून को ठेंगे पर रखने वाले इन लोगों पर कार्रवाई न होने से इनके हौसले बुलंद हैं।
क्या जनता की मांग पूरी होगी?
स्थानीय नागरिकों ने अब प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मांग साफ है:
- शहर में सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी बढ़ाई जाए।
- अनधिकृत हूटर और सायरन बजाने वाले वाहनों को तत्काल जब्त किया जाए।
- दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
बस्ती प्रशासन को यह तय करना होगा कि क्या वे इन रसूखदारों के आगे नतमस्तक रहेंगे या फिर कानून का सम्मान बहाल करेंगे। जनता अब कार्रवाई का इंतजार कर रही है।
पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर चेकिंग के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन रसूखदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई न होने के कारण इनके हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों की मांग
हम प्रशासन से मांग करते हैं कि बस्ती की सड़कों को अराजकता से मुक्त किया जाए:
- शहर में सीसीटीवी के माध्यम से इन अवैध वाहनों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
- हूटर लगे निजी वाहनों को तत्काल प्रभाव से जब्त किया जाए।
- कानून तोड़ने वाले रसूखदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
क्या बस्ती प्रशासन आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, या यह ‘हूटर आतंक’ इसी तरह चलता रहेगा?
— एक जागरूक नागरिक, बस्ती



















